RERA शिकायत: बिल्डर द्वारा विलंब
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रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 के अंतर्गत शिकायत दिनांक: _______________ प्रति, रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण _______________ विषय: परियोजना _______________ में यूनिट सं. _______________ के कब्जे में देरी हेतु _______________ के विरुद्ध शिकायत महोदय/महोदया, मैं, _______________, निवासी _______________, ईमेल: _______________, दूरभाष: _______________, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 के अंतर्गत _______________, पंजीकृत कार्यालय _______________ (आगे "प्रत्यर्थी") के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करता/करती हूं। शिकायत के तथ्य: 1. प्रत्यर्थी परियोजना _______________ का प्रमोटर है। परियोजना _______________ में स्थित है और इस प्राधिकरण में पंजीकरण सं. _______________ के अंतर्गत पंजीकृत है। 2. मैंने विक्रय करार दिनांक _______________ के अंतर्गत इस परियोजना में यूनिट सं. _______________ बुक किया था। 3. विक्रय करार के अनुसार प्रत्यर्थी को _______________ तक उक्त यूनिट का कब्जा देना था। 4. मैंने उक्त यूनिट के लिए प्रत्यर्थी को कुल रु. _______________/- का भुगतान किया है। 5. प्रत्यर्थी सहमत तिथि तक यूनिट पूरा करके उसका कब्जा देने में विफल रहा है। 6. मैं परियोजना से हटना नहीं चाहता/चाहती। अधिनियम की धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार प्रत्यर्थी मुझे कब्जा सौंपे जाने तक देरी के प्रत्येक माह के लिए विहित दर से ब्याज देने के लिए उत्तरदायी है। मांगी गई राहत: क) प्रत्यर्थी को निर्देश दिया जाए कि वह अधिभोग प्रमाणपत्र सहित यूनिट का कब्जा इस प्राधिकरण द्वारा तय की गई तिथि तक सौंपे। ख) प्रत्यर्थी को निर्देश दिया जाए कि वह _______________ से कब्जा सौंपे जाने तक देरी के प्रत्येक माह के लिए चुकाई गई राशि पर _______________ ब्याज दे। ग) मुझे अधिनियम की धारा 18 और 71 के अंतर्गत निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रतिकर का दावा करने की स्वतंत्रता दी जाए। घ) प्रत्यर्थी को इस शिकायत का व्यय देने का निर्देश दिया जाए। ङ) प्राधिकरण जो अन्य आदेश उचित समझे, पारित करे। सत्यापन मैं, _______________, सत्यापित करता/करती हूं कि ऊपर लिखे तथ्य मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य एवं सही हैं और कोई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया नहीं गया है। _______________ दिनांक: _______________
बिल्डर करार में लिखी तिथि तक कब्जा न दे तो रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) की धारा 18 आपको दो रास्ते देती है: परियोजना से हटकर जमा राशि ब्याज सहित वापस लेना, या परियोजना में बने रहकर कब्जा मिलने तक देरी के हर माह का ब्याज लेना। शिकायत धारा 31 के अंतर्गत उस राज्य के RERA प्राधिकरण में होती है जहाँ परियोजना है, और राज्य के नियम उसका प्रपत्र, शुल्क और तरीक़ा तय करते हैं। यह प्रारूप कब्जा और देरी का ब्याज माँगने वाली शिकायत का पाठ तैयार करता है।
मुख्य बातें
- धारा 18(1) के अंतर्गत चुनाव आपका है: हटना और ब्याज सहित रिफंड, या बने रहना और कब्जे तक हर माह की देरी का ब्याज। यह प्रारूप दूसरा रास्ता माँगता है।
- ब्याज की दर अधिनियम में नहीं, राज्य के नियमों में है। कई राज्य SBI की उच्चतम MCLR + 2% रखते हैं, पर हर राज्य में यही दर नहीं है।
- उच्चतम न्यायालय के Newtech Promoters (2021) निर्णय के अनुसार रिफंड और ब्याज प्राधिकरण तय करता है, जबकि मुआवजा (compensation) धारा 71 के निर्णायक अधिकारी का विषय है।
- RERA उपभोक्ता आयोग का रास्ता बंद नहीं करता — Imperia Structures बनाम अनिल पटनी (2020) में उच्चतम न्यायालय ने दोनों उपचार साथ-साथ उपलब्ध माने।
- प्राधिकरण या निर्णायक अधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील अपीलीय अधिकरण में आदेश की प्रति मिलने से 60 दिन के भीतर होती है।
यह दस्तावेज़ कब उपयोग करें
- ✓बिल्डर ने विक्रय करार में लिखी तिथि (और अनुग्रह अवधि) बीतने के बाद भी फ़्लैट या प्लॉट का कब्जा नहीं दिया
- ✓आप परियोजना में बने रहकर कब्जा और देरी के हर माह का ब्याज चाहते हैं
- ✓परियोजना RERA में पंजीकृत है और आप राज्य प्राधिकरण के लिए शिकायत का पाठ तैयार करना चाहते हैं
- ✓आप रिफंड चाहते हैं और इसी पाठ की राहत बदलकर हटने वाली शिकायत बनाना चाहते हैं
आवश्यक जानकारी की सूची
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पूरा नमूना प्रारूप
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 के अंतर्गत शिकायत
दिनांक: {{complaint_date}}
प्रति,
रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण
{{authority_name}}
विषय: परियोजना {{project_name}} में यूनिट सं. {{unit_no}} के कब्जे में देरी हेतु {{builder_name}} के विरुद्ध शिकायत
महोदय/महोदया,
मैं, {{complainant_name}}, निवासी {{complainant_address}}, ईमेल: {{complainant_email}}, दूरभाष: {{complainant_phone}}, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 के अंतर्गत {{builder_name}}, पंजीकृत कार्यालय {{builder_address}} (आगे "प्रत्यर्थी") के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करता/करती हूं।
शिकायत के तथ्य:
1. प्रत्यर्थी परियोजना {{project_name}} का प्रमोटर है। परियोजना {{rera_state}} में स्थित है और इस प्राधिकरण में पंजीकरण सं. {{rera_registration_no}} के अंतर्गत पंजीकृत है।
2. मैंने विक्रय करार दिनांक {{booking_date}} के अंतर्गत इस परियोजना में यूनिट सं. {{unit_no}} बुक किया था।
3. विक्रय करार के अनुसार प्रत्यर्थी को {{possession_promised_date}} तक उक्त यूनिट का कब्जा देना था।
4. मैंने उक्त यूनिट के लिए प्रत्यर्थी को कुल रु. {{amount_paid}}/- का भुगतान किया है।
5. प्रत्यर्थी सहमत तिथि तक यूनिट पूरा करके उसका कब्जा देने में विफल रहा है।
6. मैं परियोजना से हटना नहीं चाहता/चाहती। अधिनियम की धारा 18(1) के परंतुक के अनुसार प्रत्यर्थी मुझे कब्जा सौंपे जाने तक देरी के प्रत्येक माह के लिए विहित दर से ब्याज देने के लिए उत्तरदायी है।
मांगी गई राहत:
क) प्रत्यर्थी को निर्देश दिया जाए कि वह अधिभोग प्रमाणपत्र सहित यूनिट का कब्जा इस प्राधिकरण द्वारा तय की गई तिथि तक सौंपे।
ख) प्रत्यर्थी को निर्देश दिया जाए कि वह {{possession_promised_date}} से कब्जा सौंपे जाने तक देरी के प्रत्येक माह के लिए चुकाई गई राशि पर {{rera_interest_rate}} ब्याज दे।
ग) मुझे अधिनियम की धारा 18 और 71 के अंतर्गत निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रतिकर का दावा करने की स्वतंत्रता दी जाए।
घ) प्रत्यर्थी को इस शिकायत का व्यय देने का निर्देश दिया जाए।
ङ) प्राधिकरण जो अन्य आदेश उचित समझे, पारित करे।
सत्यापन
मैं, {{complainant_name}}, सत्यापित करता/करती हूं कि ऊपर लिखे तथ्य मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य एवं सही हैं और कोई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया नहीं गया है।
{{complainant_name}}
दिनांक: {{complaint_date}}आपका विवरण अपने आप भर जाता है। Word (.docx) या PDF में डाउनलोड करें — निःशुल्क, बिना साइनअप।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिल्डर कब्जा देने में देरी करे तो क्या करें?▼
RERA में शिकायत कैसे करें?▼
RERA में देरी पर कितना ब्याज मिलता है?▼
फ्लैट का कब्जा नहीं मिला — रिफंड लूँ या ब्याज?▼
RERA या उपभोक्ता आयोग — कहाँ शिकायत करें?▼
RERA में मानसिक पीड़ा का मुआवजा कौन देता है?▼
RERA आदेश के विरुद्ध अपील कितने दिन में करनी होती है?▼
क्या हर बिल्डर परियोजना RERA में आती है?▼
इस RERA शिकायत प्रारूप में क्या-क्या लिखा आता है
आप जो विवरण भरते हैं, उनसे यह प्रारूप एक पूरी शिकायत का पाठ बनाता है। शीर्षक में लिखा होता है कि शिकायत रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत है। शिकायत आपके राज्य के रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण को संबोधित होती है, जिसका नाम आप भरते हैं। विषय-पंक्ति में परियोजना का नाम, यूनिट संख्या और बिल्डर का नाम होता है।
पहले अनुच्छेद में आपका नाम, पता, ईमेल और फ़ोन आता है, और यह कथन कि शिकायत धारा 31 के अंतर्गत बिल्डर के पंजीकृत कार्यालय के पते पर उसके विरुद्ध है। इसके बाद छह क्रमांकित तथ्य आते हैं — छठा यह कि आप परियोजना से हटना नहीं चाहते और धारा 18(1) के परंतुक के अंतर्गत देरी का ब्याज माँगते हैं — फिर पाँच माँगी गई राहतें, और अंत में सत्यापन कि तथ्य आपकी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य हैं, आपके नाम और तिथि के साथ।
| प्रारूप का हिस्सा | क्या भरा जाता है | किस बात का ध्यान रखें |
|---|---|---|
| संबोधन | राज्य RERA प्राधिकरण का नाम | उस राज्य का प्राधिकरण जहाँ परियोजना स्थित है, न कि जहाँ आप रहते हैं |
| राज्य | परियोजना किस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में है | इसी से राहत (ख) में ब्याज दर का नियम छपता है; जिस राज्य की दर नियम के मूल पाठ से नहीं मिलाई गई, वहाँ नियमों का नाम छपता है, कोई आँकड़ा नहीं |
| तथ्य 1 | परियोजना की RERA पंजीकरण संख्या | राज्य RERA पोर्टल पर परियोजना पृष्ठ से मिलाकर लिखें |
| तथ्य 2 | विक्रय करार की तिथि, परियोजना और यूनिट संख्या | करार की तिथि वही लिखें जो दस्तावेज़ पर है |
| तथ्य 3 | करार में वादा की गई कब्जे की तिथि | करार का खंड और कोई अनुग्रह अवधि (grace period) हो तो उसे भी देखें |
| तथ्य 4 | अब तक चुकाई गई कुल राशि | रसीदों और बैंक विवरण से जोड़कर लिखें |
| तथ्य 5 | यह कथन कि बिल्डर बिना उचित कारण सहमत तिथि तक कब्जा देने में विफल रहा | बिल्डर से मिले पत्र या कारण बताए गए हों तो उनका उल्लेख जोड़ें |
| राहत (क)–(ङ) | कब्जा, राज्य के नियम की दर से देरी का ब्याज, निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रतिकर माँगने की स्वतंत्रता, और शिकायत का व्यय | मुआवजा प्राधिकरण से नहीं माँगा जाता — धारा 71 के अंतर्गत वह निर्णायक अधिकारी का विषय है |
बिल्डर कब्जा देने में देरी करे तो धारा 18 के अंतर्गत क्या अधिकार हैं
धारा 18(1) कहती है कि यदि प्रमोटर विक्रय करार की शर्तों के अनुसार, या उसमें लिखी तिथि तक, अपार्टमेंट, प्लॉट या भवन पूरा करने या उसका कब्जा देने में विफल रहता है, तो वह आवंटी (allottee) की माँग पर उत्तरदायी है। यदि आवंटी परियोजना से हटना चाहे, तो प्रमोटर को उस यूनिट के लिए प्राप्त राशि निर्धारित दर के ब्याज सहित लौटानी होगी, और अधिनियम में बताए तरीक़े से मुआवजा भी देना होगा।
इसी धारा का परंतुक (proviso) दूसरा रास्ता देता है: यदि आवंटी परियोजना से हटना नहीं चाहता, तो प्रमोटर उसे कब्जा सौंपे जाने तक देरी के हर माह का ब्याज निर्धारित दर से देगा। धारा 19(4) भी यही बात आवंटी के अधिकार के रूप में दोहराती है। उच्चतम न्यायालय ने Newtech Promoters बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021) में रिफंड के इस अधिकार को ऐसा अधिकार बताया जो किसी शर्त पर निर्भर नहीं है।
| परियोजना में बने रहना | परियोजना से हटना | |
|---|---|---|
| आधार | धारा 18(1) का परंतुक | धारा 18(1) और धारा 19(4) |
| क्या मिलता है | कब्जा, और कब्जा सौंपे जाने तक हर माह की देरी का ब्याज | चुकाई गई राशि की वापसी, ब्याज सहित, और मुआवजा |
| ब्याज कब से | करार में कब्जे की तिथि बीतने के बाद से | धारा 2(za) के अनुसार हर भुगतान प्राप्त होने की तिथि से वापसी तक |
| यह प्रारूप | यही माँगता है — राहत (क) और (ख) | इसके लिए राहत (क) और (ख) बदलनी होंगी |
| कब चुनें | परियोजना लगभग पूरी है और आपको घर चाहिए | परियोजना रुकी है, या आप अब यूनिट नहीं चाहते |
धारा 2(za) का स्पष्टीकरण कहता है कि चूक पर बिल्डर आवंटी से जिस दर से ब्याज लेता है, वही दर आवंटी को देय ब्याज की होगी।
यह प्रारूप कब्जा और देरी का ब्याज माँगता है। यदि आप परियोजना से हटकर पैसा वापस चाहते हैं, तो राहत (क) में कब्जे की जगह "चुकाई गई पूरी राशि की वापसी" लिखें और राहत (ख) में ब्याज की अवधि "हर भुगतान की तिथि से वापसी की तिथि तक" करें। एक ही शिकायत में दोनों को मुख्य राहत के रूप में माँगना विरोधाभासी होगा।
RERA में देरी पर ब्याज की दर कितनी है
अधिनियम स्वयं कोई प्रतिशत नहीं लिखता; धारा 18 "ऐसी दर जो विहित की जाए" कहती है, और यह दर हर राज्य के RERA नियमों में है। कई राज्यों के नियम इसे भारतीय स्टेट बैंक की उच्चतम सीमांत निधि लागत आधारित उधार दर (MCLR) + 2% रखते हैं — उदाहरण के लिए हरियाणा के नियमों का नियम 15 और राजस्थान के नियमों का नियम 17।
पर यह हर राज्य में एक जैसा नहीं है। Newtech Promoters (2021) के निर्णय में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन नियमों की दर MCLR + 1% दर्ज है। आंध्र प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मिज़ोरम और सिक्किम के नियम MCLR के स्थान पर SBI की प्राइम लेंडिंग रेट + 2% रखते हैं, केरल बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट, जम्मू और कश्मीर जम्मू और कश्मीर बैंक की दर, और गुजरात पहले करार में सहमत दर। इसलिए यह प्रारूप दर आपके चुने राज्य से लेता है: जिस राज्य का नियम मूल पाठ से मिलाया गया है, वहाँ नियम संख्या और दर छपती है; बाक़ी राज्यों में प्रारूप नियमों का नाम लिखता है, कोई आँकड़ा नहीं।
- 1प्रारूप में परियोजना का राज्य चुनें; फ़ील्ड के नीचे दिखता है कि कौन-सा नियम और कौन-सी दर छपेगी।
- 2करार में कब्जे की तिथि और अनुग्रह अवधि देखें — देरी उसके बाद से गिनी जाएगी।
- 3हर भुगतान की तिथि और राशि की सूची बनाएँ; बने रहने के रास्ते में ब्याज पूरी चुकाई गई राशि पर देरी की अवधि के लिए माँगा जाता है।
- 4शिकायत में दर और अवधि लिखें, पर अंतिम गणना प्राधिकरण के आदेश पर छोड़ दें — आपका काम सही आधार रखना है।
RERA में शिकायत कैसे करें — चरण दर चरण
धारा 31(1) के अनुसार कोई भी पीड़ित व्यक्ति अधिनियम, नियमों या विनियमों के उल्लंघन पर प्रमोटर, आवंटी या रियल एस्टेट एजेंट के विरुद्ध प्राधिकरण या निर्णायक अधिकारी के पास शिकायत कर सकता है; इसमें आवंटियों का संघ और पंजीकृत स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन भी शामिल हैं। धारा 31(2) के अनुसार शिकायत का प्रपत्र, तरीक़ा और शुल्क नियमों से तय होते हैं, इसलिए हर राज्य का अपना प्रपत्र और पोर्टल है।
- 1राज्य RERA पोर्टल पर परियोजना खोजें और उसकी पंजीकरण संख्या, घोषित पूर्णता तिथि और पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति सहेज लें।
- 2विक्रय करार, आवंटन पत्र, सभी भुगतान रसीदें और बैंक विवरण एक फ़ाइल में रखें।
- 3बिल्डर से हुआ पत्राचार — ईमेल, पत्र, कब्जे की नई तिथियों के संदेश — तिथिवार लगाएँ।
- 4इस प्रारूप से शिकायत का पाठ बनाएँ, परियोजना का राज्य चुनें, और राहत अपने चुने रास्ते के अनुसार ठीक करें।
- 5राज्य पोर्टल पर निर्धारित प्रपत्र भरें, यह पाठ तथ्य और राहत वाले हिस्से में रखें, दस्तावेज़ अपलोड करें और राज्य द्वारा तय शुल्क चुकाएँ।
- 6पावती और शिकायत संख्या सहेजें, और सुनवाई की तिथियाँ पोर्टल या ईमेल पर देखते रहें।
धारा 71 निर्णायक अधिकारी को धारा 12, 14, 18 और 19 के अंतर्गत मुआवजा तय करने की शक्ति देती है। Newtech Promoters (2021) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि रिफंड, उस पर ब्याज और देरी का ब्याज प्राधिकरण तय करता है, जबकि मुआवजा निर्णायक अधिकारी। कई राज्यों में इसके लिए अलग प्रपत्र है। इसलिए यह प्रारूप प्राधिकरण से मुआवजा नहीं माँगता; राहत (ग) केवल निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रतिकर का दावा करने की स्वतंत्रता माँगती है। मानसिक पीड़ा जैसे मुआवजे का दावा अपने राज्य के निर्णायक अधिकारी वाले प्रपत्र में करें।
शिकायत दाख़िल करने से पहले आपको क्या जोड़ना है
प्रारूप केवल वे तथ्य लिखता है जो आप फ़ील्ड में भरते हैं। कुछ बातें ऐसी हैं जिनके बिना सुनवाई में समय लगता है, और जिन्हें आपको स्वयं जोड़ना है।
- करार का वह खंड जिसमें कब्जे की तिथि लिखी है, और अनुग्रह अवधि हो तो उसकी समाप्ति तिथि।
- भुगतान की तिथिवार सूची — राशि, तिथि और बैंक संदर्भ सहित — संलग्नक के रूप में।
- क्या करार पंजीकृत है, और उसकी दस्तावेज़ संख्या। धारा 13(1) के अनुसार प्रमोटर लागत के 10% से अधिक अग्रिम तभी ले सकता है जब लिखित विक्रय करार करके उसे पंजीकृत करा दिया गया हो।
- बिल्डर को भेजा गया कोई नोटिस या पत्र, उसकी डाक रसीद और उत्तर (यदि आया हो)।
- शिकायत की तिथि पर परियोजना की स्थिति — अधूरी है, या अधिभोग प्रमाणपत्र (occupancy certificate) नहीं मिला है।
- संलग्नकों की सूची, और सत्यापन में यह कि कौन-से अनुच्छेद आपकी व्यक्तिगत जानकारी में सत्य हैं।
RERA या उपभोक्ता आयोग — कहाँ शिकायत करें
धारा 79 दीवानी न्यायालय को उन विषयों पर वाद सुनने से रोकती है जिन्हें प्राधिकरण, निर्णायक अधिकारी या अपीलीय अधिकरण तय कर सकते हैं। पर धारा 88 कहती है कि अधिनियम अन्य क़ानूनों के अतिरिक्त है, उनके स्थान पर नहीं। Imperia Structures बनाम अनिल पटनी (2020) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि धारा 79 उपभोक्ता आयोगों पर लागू नहीं होती, और आवंटी चुन सकता है कि वह उपभोक्ता संरक्षण क़ानून के अंतर्गत जाए या RERA के अंतर्गत।
धारा 71(1) का परंतुक यह भी अनुमति देता है कि जिसकी शिकायत उपभोक्ता मंच में लंबित है, वह उसे वापस लेकर निर्णायक अधिकारी के पास आवेदन कर सकता है। एक ही राहत के लिए दोनों मंचों पर एक साथ चलना व्यावहारिक नहीं है — एक रास्ता चुनें।
| राज्य RERA | उपभोक्ता आयोग | |
|---|---|---|
| किस परियोजना पर | RERA में पंजीकृत, या जिसे पंजीकृत होना चाहिए था | कोई भी आवासीय ख़रीद जहाँ आप उपभोक्ता हैं |
| मुख्य राहत | कब्जा, देरी का ब्याज, ब्याज सहित रिफंड | रिफंड, मुआवजा, सेवा में कमी पर राहत |
| ब्याज की दर | राज्य नियमों में निर्धारित | आयोग तय करता है |
| अपील | धारा 44 के अंतर्गत अपीलीय अधिकरण, फिर धारा 58 में उच्च न्यायालय | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की अपील व्यवस्था |
RERA आदेश से असंतुष्ट हों तो अपील
धारा 43(5) और 44 के अनुसार प्राधिकरण या निर्णायक अधिकारी के किसी निर्देश, निर्णय या आदेश से पीड़ित व्यक्ति अपीलीय अधिकरण में अपील कर सकता है। अपील आदेश की प्रति मिलने की तिथि से 60 दिन के भीतर करनी होती है; पर्याप्त कारण हो तो अधिकरण बाद में भी सुन सकता है।
यदि अपील बिल्डर करता है, तो धारा 43(5) का परंतुक कहता है कि वह अपील तभी सुनी जाएगी जब बिल्डर पहले शास्ति का कम से कम 30% (या अधिकरण द्वारा तय अधिक प्रतिशत), या आवंटी को देय पूरी राशि ब्याज और मुआवजे सहित, या दोनों, अधिकरण में जमा करे। अधिकरण के आदेश के विरुद्ध धारा 58 के अंतर्गत उच्च न्यायालय में अपील होती है।
सोदाहरण गणना
उदाहरण 1: बने रहने का रास्ता: देरी के ब्याज का उदाहरण
- कुल चुकाई गई राशि
- ₹40,00,000
- करार में कब्जे की तिथि
- 31 मार्च 2025 (अनुग्रह अवधि सहित)
- शिकायत की तिथि तक देरी
- 18 माह
- मानी गई दर
- 11% वार्षिक (केवल उदाहरण के लिए — अपने राज्य की निर्धारित दर लें)
- 1.वार्षिक ब्याज: ₹40,00,000 × 11% = ₹4,40,000।
- 2.18 माह = 1.5 वर्ष, इसलिए अब तक का ब्याज: ₹4,40,000 × 1.5 = ₹6,60,000।
- 3.यह साधारण ब्याज का उदाहरण है। वास्तविक गणना राज्य के नियम, भुगतानों की तिथियों और प्राधिकरण के आदेश से होगी।
- 4.कब्जा मिलने तक ब्याज हर माह बढ़ता रहता है — धारा 18(1) का परंतुक "कब्जा सौंपे जाने तक" कहता है।
शिकायत में आप कब्जा और करार की तिथि से कब्जे तक निर्धारित दर से ब्याज माँगते हैं; ₹6,60,000 का आँकड़ा दिखाता है कि देरी का दावा कितना बड़ा हो सकता है, पर राहत में दर और अवधि लिखना पर्याप्त है।
उदाहरण 2: हटने का रास्ता: राहत का पाठ कैसे बदलें
- स्थिति
- परियोजना दो वर्ष से रुकी है; निर्माण आगे नहीं बढ़ रहा
- भुगतान
- तीन किस्तों में, अलग-अलग तिथियों पर
- इच्छा
- परियोजना से हटकर पैसा वापस लेना
- 1.तथ्य 1 से 5 जैसे हैं वैसे रखें — वे दोनों रास्तों में समान हैं।
- 2.राहत (क) को बदलें: "प्रत्यर्थी को चुकाई गई पूरी राशि लौटाने का निर्देश दिया जाए।"
- 3.राहत (ख) को बदलें: "प्रत्येक भुगतान की तिथि से वापसी की तिथि तक, राज्य नियमों में निर्धारित दर से ब्याज।" धारा 2(za) का स्पष्टीकरण ब्याज की यही अवधि बताता है।
- 4.किस्तों की तिथिवार सूची संलग्न करें, क्योंकि हर किस्त पर ब्याज उसकी अपनी तिथि से चलेगा।
एक ही प्रारूप से हटने वाली शिकायत बन जाती है। मुआवजे की माँग अपने राज्य की व्यवस्था के अनुसार निर्णायक अधिकारी के प्रपत्र में रखें।
जाँचे गए आधिकारिक स्रोत
इस पृष्ठ के कथन जिन अधिनियमों, नियमों और नियामक पृष्ठों के विरुद्ध जाँचे गए हैं।
- The two remedies for delayed possession, the prescribed-rate rule for interest, the forum for complaints and compensation, the 10% advance limit, and the appeal route and its 60-day period.
- Newtech Promoters and Developers Pvt Ltd v. State of U.P. (Supreme Court, 11 November 2021)Refund and interest are decided by the Authority; compensation under sections 12, 14, 18 and 19 by the adjudicating officer. The unconditional right to a refund.
- Imperia Structures Ltd v. Anil Patni (2020)RERA does not oust the jurisdiction of consumer fora; the remedies are concurrent.
- Haryana Real Estate (Regulation and Development) Rules, 2017, rule 15; Rajasthan Real Estate (Regulation and Development) Rules, 2017, rule 17Examples of State rules prescribing interest at SBI’s highest MCLR plus two per cent.
शिकायत अपने राज्य के RERA पोर्टल पर, राज्य के नियमों में दिए गए प्रपत्र में, विक्रय करार और भुगतान की रसीदों के साथ दायर करें। प्रतिकर (मुआवजा) धारा 71 के अंतर्गत निर्णायक अधिकारी तय करता है, जिसके लिए प्रायः अलग प्रपत्र होता है।
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