संपत्ति विक्रय करार
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विक्रय करार यह विक्रय करार _______________ को _______________ में निष्पादित किया गया है। पक्षकार: _______________, आयु लगभग _______________ वर्ष, निवासी _______________, जिन्हें इसके बाद "विक्रेता" कहा जाएगा; तथा _______________, आयु लगभग _______________ वर्ष, निवासी _______________, जिन्हें इसके बाद "क्रेता" कहा जाएगा। विक्रेता नीचे वर्णित अचल संपत्ति के पूर्ण स्वामी हैं और उसे बेचने के इच्छुक हैं। संपत्ति का विवरण: _______________ अब दोनों पक्षों के मध्य निम्नानुसार सहमति हुई है: 1. विक्रय प्रतिफल: विक्रय का कुल मूल्य रु. _______________/- (रुपये _______________ मात्र) निर्धारित किया गया है। 2. अग्रिम राशि: क्रेता ने _______________ को अग्रिम/बयाना के रूप में रु. _______________/- (रुपये _______________ मात्र) का भुगतान किया है, जिसकी प्राप्ति विक्रेता एतद्द्वारा स्वीकार करते हैं। 3. शेष भुगतान: शेष राशि रु. _______________/- का भुगतान विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय किया जाएगा। 4. पंजीकरण: दोनों पक्ष _______________ को या उससे पहले उप-पंजीयक के समक्ष विक्रय विलेख निष्पादित करने और पंजीकृत करवाने पर सहमत हैं। 5. कब्जा: विक्रेता _______________ तक अथवा पंजीकरण के समय, जो भी पहले हो, क्रेता को संपत्ति का कब्जा देंगे। 6. स्वच्छ स्वामित्व: विक्रेता गारंटी देते हैं कि उक्त संपत्ति समस्त ऋणों, बंधकों, विवादों एवं मुकदमेबाजी से मुक्त है। 7. चूक: क्रेता की चूक की स्थिति में बयाना जब्त होगा। विक्रेता की चूक की स्थिति में विक्रेता क्रेता को दोगुनी अग्रिम राशि लौटाएंगे। साक्ष्य स्वरूप दोनों पक्षों ने ऊपर लिखी तिथि को इस करार पर हस्ताक्षर किए। विक्रेता: _______________ क्रेता: _______________ साक्षी: 1. _______________ 2. _______________
विक्रय करार (एग्रीमेंट टू सेल) वह अनुबंध है जिसमें विक्रेता और क्रेता तय शर्तों पर आगे संपत्ति बेचने-ख़रीदने पर सहमत होते हैं; संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 54 के अनुसार यह स्वयं संपत्ति में कोई हित या भार उत्पन्न नहीं करता। स्वामित्व केवल पंजीकृत विक्रय विलेख (सेल डीड) से जाता है। यदि करार के साथ क्रेता को कब्जा दिया जा रहा है, तो धारा 53A का संरक्षण पाने के लिए पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(1A) के अनुसार करार का पंजीकृत होना आवश्यक है।
मुख्य बातें
- विक्रय करार स्वामित्व अंतरित नहीं करता। विक्रेता का हक़ पंजीकृत विक्रय विलेख के निष्पादन से ही क्रेता को जाता है।
- धारा 17(1A) के अनुसार 24 सितंबर 2001 या उसके बाद निष्पादित ऐसा करार, जिसके आधार पर धारा 53A का संरक्षण चाहिए, पंजीकृत होना चाहिए — वरना उस प्रयोजन के लिए उसका कोई प्रभाव नहीं।
- अपंजीकृत करार भी विशिष्ट पालन (specific performance) के वाद में अनुबंध के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य है — पंजीकरण अधिनियम की धारा 49 का परंतुक।
- स्टाम्प शुल्क राज्य का विषय है और राज्यवार भिन्न है; कोई एक राष्ट्रीय दर नहीं है।
- विक्रेता मुकर जाए तो विशिष्ट पालन का वाद परिसीमा अधिनियम के अनुच्छेद 54 के अनुसार करार में तय तिथि से, और तिथि तय न हो तो इनकार की जानकारी से, तीन वर्ष के भीतर होना चाहिए।
यह दस्तावेज़ कब उपयोग करें
- ✓आप मकान, फ़्लैट या प्लॉट बेचने-ख़रीदने पर सहमत हुए हैं और बयाना दिया या लिया जा रहा है
- ✓विक्रय विलेख का पंजीकरण बाद की तिथि पर होना है और तब तक की शर्तें लिखित चाहिए
- ✓आप मूल्य, बयाना, शेष राशि, कब्जे की तिथि और चूक के परिणाम एक दस्तावेज़ में तय करना चाहते हैं
- ✓बैंक ऋण के लिए क्रेता को हस्ताक्षरित विक्रय करार की आवश्यकता है
आवश्यक जानकारी की सूची
दस्तावेज़ बनाने से पहले यह जानकारी तैयार रखें।
पूरा नमूना प्रारूप
विक्रय करार
यह विक्रय करार {{execution_date}} को {{execution_place}} में निष्पादित किया गया है।
पक्षकार:
{{seller_name}}, आयु लगभग {{seller_age}} वर्ष, निवासी {{seller_address}}, जिन्हें इसके बाद "विक्रेता" कहा जाएगा;
तथा
{{buyer_name}}, आयु लगभग {{buyer_age}} वर्ष, निवासी {{buyer_address}}, जिन्हें इसके बाद "क्रेता" कहा जाएगा।
विक्रेता नीचे वर्णित अचल संपत्ति के पूर्ण स्वामी हैं और उसे बेचने के इच्छुक हैं।
संपत्ति का विवरण:
{{property_description}}
अब दोनों पक्षों के मध्य निम्नानुसार सहमति हुई है:
1. विक्रय प्रतिफल: विक्रय का कुल मूल्य रु. {{sale_price}}/- (रुपये {{sale_price_words}} मात्र) निर्धारित किया गया है।
2. अग्रिम राशि: क्रेता ने {{advance_date}} को अग्रिम/बयाना के रूप में रु. {{advance_amount}}/- (रुपये {{advance_amount_words}} मात्र) का भुगतान किया है, जिसकी प्राप्ति विक्रेता एतद्द्वारा स्वीकार करते हैं।
3. शेष भुगतान: शेष राशि रु. {{balance_amount}}/- का भुगतान विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय किया जाएगा।
4. पंजीकरण: दोनों पक्ष {{registration_date}} को या उससे पहले उप-पंजीयक के समक्ष विक्रय विलेख निष्पादित करने और पंजीकृत करवाने पर सहमत हैं।
5. कब्जा: विक्रेता {{possession_date}} तक अथवा पंजीकरण के समय, जो भी पहले हो, क्रेता को संपत्ति का कब्जा देंगे।
6. स्वच्छ स्वामित्व: विक्रेता गारंटी देते हैं कि उक्त संपत्ति समस्त ऋणों, बंधकों, विवादों एवं मुकदमेबाजी से मुक्त है।
7. चूक: क्रेता की चूक की स्थिति में बयाना जब्त होगा। विक्रेता की चूक की स्थिति में विक्रेता क्रेता को दोगुनी अग्रिम राशि लौटाएंगे।
साक्ष्य स्वरूप दोनों पक्षों ने ऊपर लिखी तिथि को इस करार पर हस्ताक्षर किए।
विक्रेता: {{seller_name}}
क्रेता: {{buyer_name}}
साक्षी:
1. {{witness1_name}}
2. {{witness2_name}}आपका विवरण अपने आप भर जाता है। Word (.docx) या PDF में डाउनलोड करें — निःशुल्क, बिना साइनअप।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एग्रीमेंट टू सेल रजिस्ट्रेशन जरूरी है या नहीं?▼
एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड में क्या अंतर है?▼
क्या अपंजीकृत विक्रय करार न्यायालय में मान्य है?▼
विक्रेता रजिस्ट्री से मुकर जाए तो क्या करें?▼
क्रेता सौदा तोड़ दे तो क्या बयाना ज़ब्त हो सकता है?▼
विक्रय करार पर कितना स्टाम्प शुल्क लगता है?▼
विशिष्ट पालन का वाद कितने समय में दाख़िल करना होता है?▼
करार पर हस्ताक्षर से पहले क्रेता क्या जाँचे?▼
इस विक्रय करार प्रारूप में कौन-से खंड आते हैं
प्रारूप शीर्षक "विक्रय करार" से शुरू होता है, फिर निष्पादन की तिथि और स्थान। पक्षकार खंड में विक्रेता और क्रेता का नाम, लगभग आयु और पता आता है, और उन्हें आगे "विक्रेता" और "क्रेता" कहा जाता है। फिर "संपत्ति का विवरण" — जो आप लिखते हैं वही रहता है। इसके बाद सात क्रमांकित खंड और अंत में विक्रेता, क्रेता और दो साक्षियों के नाम।
| खंड | प्रारूप क्या कहता है | आपको क्या देखना है |
|---|---|---|
| 1. विक्रय प्रतिफल | कुल मूल्य अंकों और शब्दों में | अंक और शब्द मेल खाएँ; शब्दों वाला फ़ील्ड वैकल्पिक है, पर भरें |
| 2. अग्रिम राशि | अग्रिम/बयाना की राशि और तिथि, जिसकी रसीद विक्रेता स्वीकार करता है | भुगतान का तरीक़ा और बैंक संदर्भ जोड़ें |
| 3. शेष भुगतान | शेष राशि विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय | "शेष राशि" फ़ील्ड वैकल्पिक है — भरें, और यह कुल मूल्य घटा अग्रिम के बराबर हो |
| 4. पंजीकरण | सहमत तिथि तक उप-पंजीयक के समक्ष विक्रय विलेख का निष्पादन और पंजीकरण | यथार्थवादी तिथि रखें — बैंक ऋण हो तो उसकी स्वीकृति का समय जोड़ें |
| 5. कब्जा | कब्जे की तिथि या पंजीकरण, जो पहले हो | पंजीकरण से पहले कब्जा देना हो तो करार का पंजीकरण देखें (धारा 17(1A)) |
| 6. स्वच्छ स्वामित्व | विक्रेता की गारंटी कि संपत्ति ऋण, बंधक, विवाद और मुक़दमेबाज़ी से मुक्त है | गारंटी के भरोसे न रहें; स्वयं हक़ की जाँच करें |
| 7. चूक | क्रेता की चूक पर बयाना ज़ब्त; विक्रेता की चूक पर दोगुनी अग्रिम राशि वापस | न्यायालय इन शर्तों को कैसे देखते हैं, नीचे पढ़ें |
प्रारूप में संपत्ति का विवरण एक ही फ़ील्ड में आता है, इसलिए उसे पूरा लिखें: खसरा/सर्वे/प्लॉट/फ़्लैट संख्या, क्षेत्रफल, पूरा पता, राजस्व ग्राम या नगर क्षेत्र, और चारों दिशाओं की सीमाएँ। विक्रेता को संपत्ति किस दस्तावेज़ से मिली — उसकी तिथि और पंजीकरण संख्या — भी यहीं जोड़ें।
एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड में क्या अंतर है
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 54 विक्रय अनुबंध की परिभाषा देती है: ऐसा अनुबंध कि संपत्ति का विक्रय पक्षों द्वारा तय शर्तों पर होगा। वही धारा साफ़ कहती है कि ऐसा अनुबंध स्वयं संपत्ति में कोई हित या भार उत्पन्न नहीं करता। यानी करार के बाद भी स्वामी विक्रेता ही रहता है; क्रेता के पास केवल अनुबंध का अधिकार होता है।
उच्चतम न्यायालय ने सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज़ बनाम हरियाणा राज्य (2011) में दोहराया कि विक्रय करार, सामान्य मुख्तारनामा और वसीयत के सहारे की गई "बिक्री" हस्तांतरण नहीं है; अचल संपत्ति का स्वामित्व केवल पंजीकृत हस्तांतरण-विलेख से जाता है।
| विक्रय करार (एग्रीमेंट टू सेल) | विक्रय विलेख (सेल डीड) | |
|---|---|---|
| क्या करता है | आगे बेचने-ख़रीदने का वचन | स्वामित्व का वास्तविक हस्तांतरण |
| स्वामित्व | विक्रेता के पास रहता है | क्रेता को चला जाता है |
| पंजीकरण | धारा 53A के संरक्षण के लिए आवश्यक; अन्यथा राज्य के क़ानून पर निर्भर | ₹100 या अधिक मूल्य की अचल संपत्ति के विक्रय पर अनिवार्य |
| भुगतान | सामान्यतः अग्रिम या बयाना | सामान्यतः शेष पूरी राशि |
| उल्लंघन पर | विशिष्ट पालन या हर्जाने का वाद | स्वामित्व संबंधी उपचार |
एग्रीमेंट टू सेल का रजिस्ट्रेशन जरूरी है या नहीं
उत्तर इस पर निर्भर है कि करार के साथ कब्जा दिया जा रहा है या नहीं, और आपके राज्य का क़ानून क्या कहता है। पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(1A) — जो 24 सितंबर 2001 से प्रभावी है — कहती है कि संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 53A के प्रयोजन के लिए प्रतिफल पर अचल संपत्ति के अंतरण के अनुबंध वाले दस्तावेज़ पंजीकृत होने चाहिए, और पंजीकृत न हों तो धारा 53A के प्रयोजन के लिए उनका कोई प्रभाव नहीं होगा।
धारा 53A आंशिक पालन (part performance) का सिद्धांत है: जिस क्रेता ने करार के आधार पर कब्जा ले लिया है और अपना हिस्सा निभाने को तैयार है, उसके कब्जे को विक्रेता चुनौती नहीं दे सकता। इसलिए यदि यह प्रारूप का खंड 5 पंजीकरण से पहले कब्जा देता है, तो पंजीकृत करार के बिना क्रेता का वह संरक्षण नहीं बचता।
कुछ राज्यों ने पंजीकरण या स्टाम्प के क़ानूनों में संशोधन करके विक्रय करार पर और अपेक्षाएँ जोड़ी हैं, इसलिए अपने राज्य के उप-पंजीयक कार्यालय या राज्य पंजीकरण पोर्टल पर स्थिति देखें। बिल्डर से ख़रीद में अलग नियम है: RERA की धारा 13(1) के अनुसार प्रमोटर लागत के 10% से अधिक अग्रिम तभी ले सकता है जब लिखित विक्रय करार करके उसे पंजीकृत करा दिया गया हो।
| स्थिति | पंजीकृत करार | अपंजीकृत करार |
|---|---|---|
| धारा 53A (कब्जे का संरक्षण) | उपलब्ध, शर्तें पूरी होने पर | धारा 17(1A) के अनुसार उस प्रयोजन के लिए कोई प्रभाव नहीं |
| विशिष्ट पालन का वाद | साक्ष्य में ग्राह्य | धारा 49 के परंतुक से अनुबंध के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य |
| स्टाम्प शुल्क | राज्य के स्टाम्प क़ानून के अनुसार | कम स्टाम्पित दस्तावेज़ शुल्क और शास्ति चुकाए बिना साक्ष्य में ग्राह्य नहीं |
बयाना ज़ब्त हो सकता है या नहीं — खंड 7 को समझें
प्रारूप का खंड 7 कहता है कि क्रेता की चूक पर बयाना ज़ब्त होगा, और विक्रेता की चूक पर विक्रेता दोगुनी अग्रिम राशि लौटाएगा। ऐसी शर्तें भारत में आम हैं, पर न्यायालय उन्हें यांत्रिक रूप से लागू नहीं करते।
उच्चतम न्यायालय ने सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल (2013) में माना कि जहाँ करार की शर्तें स्पष्ट हों और क्रेता की चूक से सौदा टूटे, वहाँ विक्रेता बयाना के रूप में दी गई राशि रख सकता है। पर कैलाश नाथ एसोसिएट्स बनाम DDA (2015) में न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 74 के अंतर्गत राशि ज़ब्त करना भी उचित प्रतिकर की कसौटी पर परखा जाता है, और जहाँ कोई हानि ही न हुई हो वहाँ ज़ब्ती सही नहीं ठहरती। इसलिए बयाना सौदे के अनुपात में उचित रखें, और यह स्पष्ट लिखें कि कौन-सी राशि बयाना है और कौन-सी केवल अग्रिम।
- "अग्रिम राशि" फ़ील्ड में वही राशि लिखें जिसे दोनों पक्ष बयाना मान रहे हैं; बाद की किस्तें अलग लिखें।
- क्रेता हैं तो खंड 7 में जोड़ें कि दोगुनी राशि लौटाना आपके विशिष्ट पालन माँगने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना है।
- विक्रेता हैं तो लिखें कि ज़ब्ती से पहले क्रेता को चूक की लिखित सूचना और उसे सुधारने का समय दिया जाएगा।
- हर भुगतान बैंक से करें और करार में उसका संदर्भ लिखें; नक़द बयाना बाद में सबसे अधिक विवाद का कारण बनता है।
विक्रेता रजिस्ट्री से मुकर जाए तो क्या करें
विशिष्ट अनुतोष (संशोधन) अधिनियम, 2018 के बाद विशिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 10 कहती है कि अनुबंध का विशिष्ट पालन न्यायालय द्वारा कराया जाएगा, धारा 11(2), 14 और 16 के अधीन। धारा 16 में वह शर्त है जिस पर सबसे अधिक वाद हारे जाते हैं: क्रेता को दिखाना होता है कि वह अपना हिस्सा निभाने के लिए तैयार और इच्छुक रहा है।
- 1करार की पंजीकरण तिथि (खंड 4) से पहले शेष राशि की व्यवस्था का प्रमाण रखें — बैंक विवरण, ऋण स्वीकृति पत्र।
- 2विक्रेता को लिखित सूचना भेजें कि आप शेष राशि देकर विलेख पंजीकृत कराने को तैयार हैं, और एक तिथि दें।
- 3विक्रेता न आए तो उप-पंजीयक कार्यालय में अपनी उपस्थिति का कोई प्रमाण रखें।
- 4परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 54 के अनुसार विशिष्ट पालन का वाद करार में तय तिथि से तीन वर्ष के भीतर, और तिथि तय न हो तो विक्रेता के इनकार की जानकारी से तीन वर्ष के भीतर दाख़िल करें।
- 5विशिष्ट पालन न चाहें तो खंड 7 के अनुसार दोगुनी अग्रिम राशि की माँग करें।
हस्ताक्षर से पहले क्रेता कौन-सी जाँच करे
- विक्रेता के हक़ के दस्तावेज़ों की पूरी शृंखला — पिछले विक्रय विलेख, विभाजन, दान या उत्तराधिकार के कागज़ — मूल देखकर।
- उप-पंजीयक कार्यालय से भार प्रमाणपत्र (encumbrance certificate), ताकि पंजीकृत बंधक या अन्य भार दिख जाए।
- राजस्व अभिलेख या नगर निकाय में दाख़िल-ख़ारिज, और संपत्ति कर की अद्यतन रसीदें।
- फ़्लैट हो तो सोसाइटी का अनापत्ति पत्र; निर्मित संपत्ति हो तो स्वीकृत नक़्शा और अधिभोग प्रमाणपत्र।
- संपत्ति पर बैंक ऋण हो तो बैंक से बकाया राशि का पत्र, और यह तय करना कि ऋण कैसे चुकेगा।
- सभी सह-स्वामियों के हस्ताक्षर — एक सह-स्वामी पूरी संपत्ति का करार नहीं कर सकता।
खंड 6 में विक्रेता गारंटी देता है कि संपत्ति ऋण, बंधक और विवाद से मुक्त है। यह गारंटी बाद में दावे का आधार बनती है, पर वह आपको वह संपत्ति नहीं दिला सकती जिस पर पहले से बैंक का भार है। पहले जाँच, फिर बयाना।
सोदाहरण गणना
उदाहरण 1: प्रतिफल, बयाना और शेष राशि
- विक्रय मूल्य
- ₹50,00,000
- बयाना (खंड 2)
- ₹5,00,000, करार के दिन बैंक अंतरण से
- पंजीकरण की सहमत तिथि (खंड 4)
- करार से 90 दिन बाद
- 1.शेष राशि (खंड 3): ₹50,00,000 − ₹5,00,000 = ₹45,00,000, विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय देय।
- 2.प्रारूप में "शेष राशि" वैकल्पिक फ़ील्ड है — इसे ₹45,00,000 भरें ताकि खंड 3 में राशि छपे।
- 3.शब्दों में: "पचास लाख" और "पाँच लाख" — दोनों शब्द-फ़ील्ड भरें ताकि अंकों से मेल दिखे।
- 4.बयाना मूल्य का 10% है; खंड 7 के अंतर्गत यही राशि ज़ब्ती या दोगुनी वापसी का आधार होगी।
करार में ₹50,00,000 का मूल्य, ₹5,00,000 का बयाना और ₹45,00,000 की शेष राशि स्पष्ट दर्ज होती है, और तीनों आपस में मेल खाते हैं।
उदाहरण 2: विक्रेता की चूक: खंड 7 का प्रभाव
- बयाना
- ₹5,00,000
- घटना
- विक्रेता ने अधिक मूल्य मिलने पर सहमत तिथि को पंजीकरण से इनकार किया
- क्रेता की तैयारी
- ऋण स्वीकृत, शेष राशि उपलब्ध
- 1.खंड 7 के अनुसार विक्रेता दोगुनी अग्रिम राशि लौटाएगा: ₹5,00,000 × 2 = ₹10,00,000।
- 2.क्रेता सौदा ही चाहता है तो विशिष्ट पालन का वाद कर सकता है — धारा 10 के अंतर्गत न्यायालय विशिष्ट पालन कराएगा, धारा 16 की तैयारी और इच्छा की शर्त के अधीन।
- 3.ऋण स्वीकृति पत्र और विक्रेता को भेजी गई तैयारी की सूचना इस शर्त के प्रमाण हैं।
- 4.वाद पंजीकरण की सहमत तिथि से तीन वर्ष के भीतर (परिसीमा अधिनियम, अनुच्छेद 54)।
क्रेता के पास दो रास्ते हैं: ₹10,00,000 की माँग, या विशिष्ट पालन। करार में यह लिखा हो कि दोगुनी वापसी विशिष्ट पालन के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना है, तो दूसरा रास्ता अधिक सुरक्षित रहता है।
जाँचे गए आधिकारिक स्रोत
इस पृष्ठ के कथन जिन अधिनियमों, नियमों और नियामक पृष्ठों के विरुद्ध जाँचे गए हैं।
- Part performance; a contract for sale does not of itself create any interest in or charge on the property.
- Contracts for the purpose of section 53A must be registered if executed on or after 24 September 2001; an unregistered one may be received as evidence of a contract in a suit for specific performance.
- Suraj Lamp & Industries (P) Ltd v. State of Haryana (2011)A GPA sale conveys no title and is not a transfer of immovable property.
- Specific Relief Act, 1963 — Sections 10 and 16 (as amended in 2018)Specific performance shall be enforced, subject to sections 11(2), 14 and 16; readiness and willingness.
- Limitation Act, 1963 — Schedule, Article 54Three years from the date fixed for performance, or from notice of refusal where no date is fixed.
- Indian Contract Act, 1872 — Section 74; Satish Batra v. Sudhir Rawal (2013); Kailash Nath Associates v. DDA (2015)Forfeiture of earnest money where the terms are clear, and the reasonable-compensation test that governs forfeiture.
- An unstamped or under-stamped instrument is not admissible until the duty and penalty are paid. Rates are set by the state.
- No advance above ten per cent of the cost without a written, registered agreement for sale.
अपने राज्य के स्टाम्प अधिनियम के अनुसार इस करार पर स्टाम्प शुल्क दें। यदि विक्रय विलेख से पहले कब्जा दिया जा रहा है, तो इस करार का पंजीकरण कराएँ (रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(1क)), अन्यथा क्रेता संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 53क का लाभ नहीं ले सकता। विक्रय विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है।
अपना दस्तावेज़ तैयार करें
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