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किरायेदार बेदखली नोटिस

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आपका दस्तावेज़किरायेदार बेदखली नोटिस
बेदखली सूचना

दिनांक: _______________

प्रति,
_______________
_______________

विषय: किरायेदारी समाप्ति तथा _______________ पर स्थित परिसर खाली करने की सूचना

महोदय/महोदया,

मैं, _______________, _______________ पर स्थित परिसर का स्वामी एवं मकान मालिक, आपको यह सूचना देता/देती हूं।

आप _______________ से उक्त परिसर में मेरे किरायेदार हैं। इस सूचना का कारण निम्नलिखित है:

_______________

मैं एतद्द्वारा उक्त परिसर की आपकी किरायेदारी _______________ से समाप्त करता/करती हूं। आपसे अपेक्षा है कि आप उस तिथि को या उससे पहले परिसर शांतिपूर्वक खाली करके सभी चाबियों सहित उसका खाली कब्जा मुझे सौंप दें।

यदि आप उक्त तिथि तक परिसर खाली नहीं करते, तो मैं सक्षम किराया नियंत्रक, किराया प्राधिकारी, किराया न्यायालय या सिविल न्यायालय में आपकी बेदखली की कार्यवाही करूंगा/करूंगी, और आपसे अंतःकालीन लाभ (mesne profits), हर्जाना तथा कार्यवाही का व्यय भी वसूल करूंगा/करूंगी।

यह सूचना विधि के अंतर्गत मेरे अन्य अधिकारों एवं उपचारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दी जा रही है।

_______________
दिनांक: _______________
संक्षिप्त उत्तर

किरायेदार बेदखली नोटिस वह लिखित सूचना है जिसमें मकान मालिक किरायेदार से एक तय तिथि तक परिसर खाली करने को कहता है। जहाँ संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 लागू है और करार या स्थानीय क़ानून कुछ और नहीं कहता, वहाँ मासिक किरायेदारी की धारा 106 के अंतर्गत 15 दिन के नोटिस से समाप्त होती है, जो नोटिस मिलने की तिथि से गिने जाते हैं। पर जिन राज्यों में किराया नियंत्रण अधिनियम लागू है, वहाँ बेदखली के आधार और प्रक्रिया वही अधिनियम तय करता है — कोई एक राष्ट्रीय नियम नहीं है।

मुख्य बातें

  • नोटिस बेदखली नहीं है। किरायेदार न माने तो कब्जा वापस पाने का रास्ता सक्षम किराया न्यायालय, किराया प्राधिकारी या दीवानी न्यायालय है — प्रारूप भी यही कहता है।
  • धारा 106 का 15 दिन का नियम तभी लागू है जब करार, स्थानीय क़ानून या प्रथा कुछ और न कहे। पहले अपना किराया करार और राज्य का किराया क़ानून देखें।
  • धारा 106(3) के अनुसार नोटिस केवल इसलिए अमान्य नहीं होता कि उसमें दी गई अवधि कम है, बशर्ते वाद या कार्यवाही उस अवधि के बीतने के बाद दाख़िल हो।
  • नोटिस लिखित, हस्ताक्षरित हो और डाक से भेजा जाए या किरायेदार अथवा उसके परिवार के सदस्य को दिया जाए; यह संभव न हो तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाया जाए।
  • बिजली-पानी काटकर या ताला बदलकर किरायेदार को निकालना ग़ैरक़ानूनी है; उदाहरण के लिए दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 45 आवश्यक सेवाएँ रोकने पर रोक लगाती है।

यह दस्तावेज़ कब उपयोग करें

  • किरायेदारी की अवधि समाप्त हो गई है और आप परिसर वापस चाहते हैं
  • किरायेदार ने किराया नहीं दिया या करार की कोई शर्त तोड़ी है, और आप किरायेदारी समाप्त करना चाहते हैं
  • आप बेदखली की कार्यवाही से पहले लिखित नोटिस और उसकी सेवा का प्रमाण बनाना चाहते हैं
  • मौखिक या मासिक किरायेदारी को धारा 106 के अनुसार नोटिस देकर समाप्त करना है

आवश्यक जानकारी की सूची

दस्तावेज़ बनाने से पहले यह जानकारी तैयार रखें।

सूचना की दिनांक
किरायेदार का नाम
किरायेदार का पता
आपका पूरा नाम (मकान मालिक)
संपत्ति का पता
किरायेदारी शुरू होने की तिथि
बेदखली का कारण
खाली करने की अंतिम तिथि

पूरा नमूना प्रारूप

बेदखली सूचना

दिनांक: {{notice_date}}

प्रति,
{{tenant_name}}
{{tenant_address}}

विषय: किरायेदारी समाप्ति तथा {{property_address}} पर स्थित परिसर खाली करने की सूचना

महोदय/महोदया,

मैं, {{landlord_name}}, {{property_address}} पर स्थित परिसर का स्वामी एवं मकान मालिक, आपको यह सूचना देता/देती हूं।

आप {{lease_start_date}} से उक्त परिसर में मेरे किरायेदार हैं। इस सूचना का कारण निम्नलिखित है:

{{eviction_reason}}

मैं एतद्द्वारा उक्त परिसर की आपकी किरायेदारी {{vacate_by_date}} से समाप्त करता/करती हूं। आपसे अपेक्षा है कि आप उस तिथि को या उससे पहले परिसर शांतिपूर्वक खाली करके सभी चाबियों सहित उसका खाली कब्जा मुझे सौंप दें।

यदि आप उक्त तिथि तक परिसर खाली नहीं करते, तो मैं सक्षम किराया नियंत्रक, किराया प्राधिकारी, किराया न्यायालय या सिविल न्यायालय में आपकी बेदखली की कार्यवाही करूंगा/करूंगी, और आपसे अंतःकालीन लाभ (mesne profits), हर्जाना तथा कार्यवाही का व्यय भी वसूल करूंगा/करूंगी।

यह सूचना विधि के अंतर्गत मेरे अन्य अधिकारों एवं उपचारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दी जा रही है।

{{landlord_name}}
दिनांक: {{notice_date}}
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरायेदार को घर खाली करने का नोटिस कितने दिन का होना चाहिए?
पहले किराया करार देखें — उसमें लिखी नोटिस अवधि लागू होती है। करार, स्थानीय क़ानून या प्रथा चुप हो तो संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 106 के अनुसार मासिक किरायेदारी 15 दिन के नोटिस से समाप्त होती है, जो नोटिस मिलने की तिथि से गिने जाते हैं। जिन राज्यों में किराया नियंत्रण अधिनियम लागू है, वहाँ उसका नियम चलता है। डाक के समय के लिए कुछ दिन अतिरिक्त रखें।
मकान खाली कराने का नोटिस कैसे भेजें?
धारा 106(4) के अनुसार नोटिस लिखित और हस्ताक्षरित हो, और डाक से भेजा जाए या किरायेदार अथवा उसके परिवार के सदस्य या नौकर को उसके निवास पर दिया जाए; यह संभव न हो तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाया जाए। पंजीकृत डाक सबसे अच्छा प्रमाण देती है। रसीद, ट्रैकिंग और नोटिस की प्रति संभालकर रखें।
किरायेदार घर खाली नहीं कर रहा तो क्या करें?
नोटिस की अवधि बीतने के बाद सक्षम मंच में बेदखली की कार्यवाही करें — जहाँ किराया नियंत्रण अधिनियम लागू है वहाँ किराया नियंत्रक या किराया न्यायालय, अन्यथा दीवानी न्यायालय। ताला बदलना, सामान बाहर रखना या बिजली-पानी कटवाना क़ानूनी रास्ता नहीं है और आपके विरुद्ध कार्यवाही का कारण बन सकता है। करार, किराये की रसीदें और नोटिस का प्रमाण तैयार रखें।
क्या 15 दिन से कम का नोटिस अमान्य हो जाता है?
केवल इसी कारण से नहीं। 2002 के संशोधन से जुड़ी धारा 106(3) कहती है कि नोटिस इसलिए अमान्य नहीं माना जाएगा कि उसमें दी गई अवधि उपधारा (1) की अवधि से कम है, बशर्ते वाद या कार्यवाही उस अवधि के बीतने के बाद दाख़िल हो। फिर भी सही अवधि देना बेहतर है, क्योंकि किराया करार या राज्य क़ानून लंबी अवधि माँग सकता है।
किराया नियंत्रण अधिनियम वाले राज्य में बेदखली कैसे होती है?
वहाँ किरायेदार को केवल उस अधिनियम में लिखे आधारों पर निकाला जा सकता है, जैसे किराया न देना, बिना अनुमति शिकमी देना, क्षति या मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता, और मामला किराया नियंत्रक या किराया न्यायालय में जाता है। कई अधिनियम हर परिसर पर लागू भी नहीं होते; दिल्ली का 1958 का अधिनियम ₹3,500 मासिक से अधिक किराये वाले परिसरों पर लागू नहीं होता।
बेदखली नोटिस में कारण क्या लिखें?
तथ्य लिखें, आरोप नहीं। बकाया किराया हो तो कौन-से महीने और कुल राशि; अवधि समाप्त हुई हो तो करार की तिथि और समाप्ति तिथि; शर्त टूटी हो तो करार का खंड और उल्लंघन। राज्य किराया क़ानून लागू हो तो कारण उसके आधारों में से एक होना चाहिए। प्रारूप आपका कारण आपके ही शब्दों में रखता है, इसलिए उसे स्पष्ट और तिथिवार लिखें।
क्या मकान मालिक किरायेदार की बिजली-पानी काट सकता है?
नहीं। किरायेदार को निकालने के लिए आवश्यक सेवाएँ रोकना क़ानूनी रास्ता नहीं है। उदाहरण के लिए दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 45 मकान मालिक को बिना उचित और पर्याप्त कारण के पानी, बिजली, सीढ़ियों की रोशनी या सफ़ाई जैसी सेवाएँ काटने से रोकती है, और किरायेदार किराया नियंत्रक से उन्हें बहाल करा सकता है। अन्य राज्यों के क़ानूनों में भी ऐसे प्रावधान हैं।
क्या यह नोटिस मैं स्वयं भेज सकता हूँ?
हाँ। धारा 106(4) नोटिस देने वाले द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षर की अनुमति देती है, इसलिए मकान मालिक स्वयं हस्ताक्षर करके भेज सकता है। यह प्रारूप इसी के लिए बना है — पूरा पाठ मकान मालिक की ओर से "मैं" की भाषा में है। GetNyay यह प्रारूप निःशुल्क भरता है।

इस बेदखली नोटिस प्रारूप में क्या लिखा आता है

यह प्रारूप एक छोटा, सीधा नोटिस बनाता है। शीर्षक "बेदखली सूचना" है, फिर तिथि, और किरायेदार का नाम और पता। विषय-पंक्ति में उस परिसर का पता होता है जिसे खाली कराना है। पहले अनुच्छेद में आप स्वयं को संपत्ति का स्वामी बताते हैं, फिर यह कि किरायेदार किस तिथि से परिसर में रह रहा है।

इसके बाद वह कारण आता है जो आप "बेदखली का कारण" फ़ील्ड में लिखते हैं — प्रारूप इसे आपके शब्दों में ही रखता है। फिर यह कथन कि आप उस तिथि से किरायेदारी समाप्त कर रहे हैं, उस तिथि तक शांतिपूर्वक परिसर खाली करके सभी चाबियों सहित खाली कब्जा सौंपने की अपेक्षा, और यह चेतावनी कि ऐसा न होने पर आप सक्षम किराया नियंत्रक, किराया प्राधिकारी, किराया न्यायालय या दीवानी न्यायालय में बेदखली की कार्यवाही करेंगे और अंतःकालीन लाभ, हर्जाना तथा कार्यवाही का व्यय वसूलेंगे। पूरा नोटिस "मैं" की भाषा में है, क्योंकि उस पर मकान मालिक के रूप में आप स्वयं हस्ताक्षर करते हैं। अंत में आपका नाम और तिथि।

प्रारूप के फ़ील्ड और उन्हें भरने का तरीक़ा
फ़ील्डक्या लिखेंक्यों ज़रूरी है
सूचना की दिनांकजिस दिन नोटिस भेजा जा रहा हैनोटिस की अवधि इसी के आसपास से, और धारा 106(2) में प्राप्ति की तिथि से, गिनी जाती है
किरायेदार का नाम और पताकरार में लिखा पूरा नाम; पता वही परिसरग़लत नाम या पता सेवा (service) पर विवाद खड़ा करता है
संपत्ति का पतामकान/फ़्लैट संख्या, भवन, मोहल्ला, शहर, पिनकिस परिसर की बात है, इसमें कोई संदेह न रहे
किरायेदारी शुरू होने की तिथिकरार की तिथि या कब्जा देने की तिथिकिरायेदारी का महीना कब पूरा होता है, यह इसी से दिखता है
बेदखली का कारणतथ्यात्मक कारण — बकाया किराया, अवधि समाप्त, बिना अनुमति शिकमी देना आदिराज्य किराया क़ानून में आधार सीमित हो सकते हैं; कारण उन्हीं में से होना चाहिए
खाली करने की अंतिम तिथिकम से कम उतने दिन बाद की तिथि जितना नोटिस करार या क़ानून माँगता हैकम अवधि पर कार्यवाही उस अवधि के बाद ही हो सकती है

किरायेदार को घर खाली करने का नोटिस कितने दिन का होना चाहिए

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 106(1) कहती है कि करार, स्थानीय क़ानून या प्रथा के अभाव में, कृषि या विनिर्माण के प्रयोजन से भिन्न किसी भी प्रयोजन का पट्टा मासिक पट्टा माना जाता है और मकान मालिक या किरायेदार 15 दिन के नोटिस से उसे समाप्त कर सकता है। कृषि या विनिर्माण के प्रयोजन का पट्टा वार्षिक माना जाता है और छह माह के नोटिस से समाप्त होता है।

2002 के संशोधन ने तीन बातें जोड़ीं। धारा 106(2): अवधि नोटिस मिलने की तिथि से शुरू होती है। धारा 106(3): नोटिस केवल इसलिए अमान्य नहीं होगा कि उसमें लिखी अवधि उपधारा (1) की अवधि से कम है, बशर्ते वाद या कार्यवाही उपधारा (1) की अवधि बीतने के बाद दाख़िल हो। धारा 106(4): नोटिस लिखित हो, देने वाले द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित हो, और डाक से भेजा जाए या व्यक्तिगत रूप से या परिवार के सदस्य अथवा नौकर को उसके निवास पर दिया जाए; यह संभव न हो तो संपत्ति के प्रमुख भाग पर चिपकाया जाए।

नोटिस अवधि कौन तय करता है — प्राथमिकता के क्रम में
स्रोतक्या देखें
राज्य का किराया क़ानूनजहाँ लागू है, वहाँ बेदखली के आधार, नोटिस और मंच वही तय करता है
आपका किराया करारकरार में लिखी नोटिस अवधि — जैसे एक या दो माह — धारा 106 के 15 दिन पर प्रभावी होती है
धारा 106, संपत्ति अंतरण अधिनियमकरार या स्थानीय क़ानून चुप हो तो: मासिक पट्टे पर 15 दिन, कृषि/विनिर्माण पट्टे पर छह माह
ℹ️
अवधि में थोड़ा अतिरिक्त समय रखें

पंजीकृत डाक कुछ दिन में पहुँचती है, और अवधि उसके मिलने से गिनी जाती है। इसलिए "खाली करने की अंतिम तिथि" भेजने की तिथि से ठीक 15 दिन पर न रखें; डाक का समय जोड़कर तिथि तय करें, और करार में लंबी अवधि हो तो वही लें।

राज्य का किराया नियंत्रण अधिनियम बेदखली को कैसे बदलता है

बेदखली का कोई एक राष्ट्रीय नियम नहीं है। कई राज्यों के किराया नियंत्रण अधिनियम यह तय करते हैं कि किरायेदार को किन आधारों पर ही निकाला जा सकता है — जैसे किराया न देना, बिना अनुमति शिकमी देना, परिसर को क्षति, या मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता — और यह कि मामला किराया नियंत्रक या किराया न्यायालय में जाएगा। ऐसे परिसर पर धारा 106 का नोटिस अकेले पर्याप्त नहीं होता; उस अधिनियम का आधार भी सिद्ध करना होता है।

ये अधिनियम हर परिसर पर लागू भी नहीं होते। उदाहरण के लिए, दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 ₹3,500 मासिक से अधिक किराये वाले परिसरों पर लागू नहीं होता; वहाँ सामान्यतः संपत्ति अंतरण अधिनियम का रास्ता बचता है। जिन राज्यों ने आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के आधार पर क़ानून बनाया है, वहाँ किराया प्राधिकारी और किराया न्यायालय की अपनी व्यवस्था है।

  1. 1देखें कि आपके राज्य और शहर में कौन-सा किराया क़ानून लागू है, और क्या आपका परिसर उसके दायरे में आता है।
  2. 2यदि आता है, तो उस अधिनियम के बेदखली के आधार पढ़ें और नोटिस का कारण उन्हीं में से एक पर रखें।
  3. 3उस अधिनियम में अलग नोटिस या अवधि की माँग हो तो उसका पालन करें — प्रारूप की तिथि उसी के अनुसार रखें।
  4. 4यदि परिसर उसके दायरे से बाहर है, तो करार और धारा 106 तथा 111 के अनुसार किरायेदारी समाप्त करें।

किरायेदारी किन तरीक़ों से समाप्त होती है — धारा 111

संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 पट्टा समाप्त होने के तरीक़े बताती है। बेदखली नोटिस के लिए तीन सबसे प्रासंगिक हैं, और आपका "बेदखली का कारण" बताता है कि आप किस पर निर्भर हैं।

धारा 111 के तीन प्रासंगिक खंड
खंडकब लागूनोटिस में क्या लिखें
111(a) — अवधि बीतनाकरार की तय अवधि समाप्त हो गई और नवीनीकरण नहीं हुआकरार की तिथि, अवधि और समाप्ति तिथि
111(g) — समपहरण (forfeiture)किरायेदार ने करार की ऐसी स्पष्ट शर्त तोड़ी जिस पर पुनः प्रवेश का अधिकार लिखा हैशर्त का खंड, उल्लंघन, और पट्टा समाप्त करने का आशय — धारा 111(g) लिखित सूचना माँगती है
111(h) — नोटिस की अवधि बीतनापट्टा समाप्त करने का नोटिस विधिवत दिया गया और उसकी अवधि बीत गईयह कि इस नोटिस से किरायेदारी समाप्त की जा रही है, और अंतिम तिथि

मकान खाली कराने का नोटिस कैसे भेजें और क्या साथ रखें

  1. 1प्रारूप भरें और कारण तथ्यात्मक लिखें — तिथियाँ, राशि और करार का संबंधित खंड।
  2. 2बकाया किराया कारण है तो कौन-से महीने और कुल कितनी राशि बाक़ी है, यह कारण में लिखें; चाहें तो बकाये की सूची संलग्न करें।
  3. 3नोटिस पर हस्ताक्षर करें और उसकी प्रतियाँ रखें।
  4. 4पंजीकृत डाक (प्राप्ति-स्वीकृति सहित) से भेजें; धारा 106(4) डाक से भेजने की अनुमति देती है, और रसीद तथा ट्रैकिंग सेवा का प्रमाण बनते हैं।
  5. 5हाथ से दें तो प्रति पर प्राप्ति के हस्ताक्षर और तिथि लें; कोई न मिले तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाकर उसकी फ़ोटो रखें।
  6. 6करार की प्रति, किराये की रसीदें और पत्राचार एक फ़ाइल में रखें — कार्यवाही होने पर यही आपके साक्ष्य होंगे।
⚠️
स्वयं कब्जा लेने का प्रयास न करें

ताला बदलना, सामान बाहर रखना, या बिजली-पानी कटवाना बेदखली का क़ानूनी रास्ता नहीं है और उल्टा आपके विरुद्ध कार्यवाही का कारण बन सकता है। दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 45 जैसे प्रावधान किरायेदार को ऐसी सेवाएँ बहाल कराने के लिए किराया नियंत्रक के पास जाने का अधिकार देते हैं। नोटिस की अवधि बीतने पर किरायेदार न जाए तो सक्षम मंच में कार्यवाही करें।

बेदखली नोटिस की आम ग़लतियाँ

  • करार में लिखी नोटिस अवधि से कम समय देना।
  • भेजने की तिथि से 15 दिन गिनना, जबकि अवधि नोटिस मिलने से गिनी जाती है।
  • ऐसा कारण लिखना जो राज्य के किराया क़ानून में बेदखली का आधार ही नहीं है।
  • कारण में भावनात्मक या आरोप वाली भाषा — तथ्य, तिथियाँ और राशि पर्याप्त हैं।
  • केवल व्हाट्सऐप पर भेजना और डाक या हस्त-सेवा का कोई प्रमाण न रखना।
  • नोटिस की अवधि बीतने से पहले ही कार्यवाही दाख़िल कर देना।
  • नोटिस में यह न लिखना कि किरायेदारी किस तिथि से समाप्त की जा रही है — धारा 111(h) के लिए यही कथन निर्णायक है।

सोदाहरण गणना

उदाहरण 1: बिना लिखित करार की मासिक किरायेदारी

किरायेदारी
मौखिक, मासिक किराया ₹12,000
राज्य किराया क़ानून
परिसर उसके दायरे में नहीं
नोटिस भेजा
1 अक्टूबर 2026, पंजीकृत डाक से
नोटिस मिला
5 अक्टूबर 2026 (ट्रैकिंग के अनुसार)
  1. 1.करार नहीं है, इसलिए धारा 106(1) लागू: मासिक पट्टा, 15 दिन का नोटिस।
  2. 2.धारा 106(2): अवधि 5 अक्टूबर से गिनी जाएगी, इसलिए 15 दिन 20 अक्टूबर 2026 को पूरे होते हैं।
  3. 3.डाक में देरी का जोखिम देखते हुए नोटिस में खाली करने की तिथि 31 अक्टूबर 2026 रखी गई।
  4. 4.किरायेदार न जाए तो कार्यवाही 20 अक्टूबर के बाद ही दाख़िल हो — यहाँ 31 अक्टूबर के बाद।
परिणाम

1 अक्टूबर को भेजे गए नोटिस में 31 अक्टूबर की तिथि रखने से धारा 106 की 15 दिन की अवधि डाक के समय के बाद भी पूरी रहती है।

उदाहरण 2: 11 माह के करार में दो माह की नोटिस अवधि

करार
11 माह, 1 जनवरी 2026 से
नोटिस खंड
दोनों पक्षों के लिए दो माह
कारण
करार की अवधि 30 नवंबर 2026 को समाप्त; नवीनीकरण नहीं होगा
  1. 1.करार में दो माह का नोटिस लिखा है, इसलिए धारा 106 का 15 दिन का नियम पीछे चला जाता है — धारा 106 स्वयं "करार के अभाव में" लागू होती है।
  2. 2.कारण में लिखें कि करार 1 जनवरी 2026 से 11 माह का था और 30 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है (धारा 111(a))।
  3. 3.दो माह की अवधि का पालन करने के लिए नोटिस सितंबर के अंत तक भेजें, ताकि किरायेदार को 30 नवंबर से पहले पूरे दो माह मिलें।
  4. 4.खाली करने की तिथि 30 नवंबर 2026 रखें और सुरक्षा जमा की वापसी का उल्लेख अलग पत्र में करें।
परिणाम

करार की अपनी नोटिस अवधि का पालन करने वाला नोटिस, जिसमें अवधि-समाप्ति का आधार स्पष्ट है।

जाँचे गए आधिकारिक स्रोत

इस पृष्ठ के कथन जिन अधिनियमों, नियमों और नियामक पृष्ठों के विरुद्ध जाँचे गए हैं।

  • Fifteen days’ notice for a monthly lease absent contract, local law or usage; the period runs from receipt; a short notice is not invalid if proceedings follow the statutory period; modes of service; and the ways a lease is determined.
  • Delhi Rent Control Act, 1958 — Sections 3(c) and 45
    An example of a State rent law: premises above ₹3,500 monthly rent are outside it, and a landlord may not cut off or withhold essential supplies.
  • Model Tenancy Act, 2021
    A model law binding only in states and union territories that have enacted or adopted it. Deposit capped at two months’ rent for residential premises.
⚠️
विधिक अस्वीकरण

पंजीकृत डाक (प्राप्ति-स्वीकृति सहित) से भेजें, या हाथ से देकर प्राप्ति के हस्ताक्षर लें; दोनों संभव न हों तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाएँ (संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 106(4))। जहाँ धारा 106 की 15 दिन की अवधि लागू है, वह नोटिस मिलने की तिथि से गिनी जाती है।

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