किरायेदार बेदखली नोटिस
100% निःशुल्क · Word और PDF डाउनलोड · कोई साइनअप नहीं
यही दस्तावेज़ अंग्रेज़ी में: English version
अपना विवरण भरें
नीचे दिए गए फ़ील्ड भरें। आप जैसे-जैसे लिखेंगे, दस्तावेज़ बदलता जाएगा, और आप उसे PDF या Word फ़ाइल के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं। निःशुल्क — कोई साइनअप नहीं, कोई भुगतान नहीं।
डाउनलोड दबाने तक आपकी कोई भी जानकारी कहीं नहीं भेजी जाती, और फ़ाइल बनने के बाद रखी नहीं जाती।
हस्ताक्षर करने या भेजने से पहले पूरा दस्तावेज़ पढ़ लें।
बेदखली सूचना दिनांक: _______________ प्रति, _______________ _______________ विषय: किरायेदारी समाप्ति तथा _______________ पर स्थित परिसर खाली करने की सूचना महोदय/महोदया, मैं, _______________, _______________ पर स्थित परिसर का स्वामी एवं मकान मालिक, आपको यह सूचना देता/देती हूं। आप _______________ से उक्त परिसर में मेरे किरायेदार हैं। इस सूचना का कारण निम्नलिखित है: _______________ मैं एतद्द्वारा उक्त परिसर की आपकी किरायेदारी _______________ से समाप्त करता/करती हूं। आपसे अपेक्षा है कि आप उस तिथि को या उससे पहले परिसर शांतिपूर्वक खाली करके सभी चाबियों सहित उसका खाली कब्जा मुझे सौंप दें। यदि आप उक्त तिथि तक परिसर खाली नहीं करते, तो मैं सक्षम किराया नियंत्रक, किराया प्राधिकारी, किराया न्यायालय या सिविल न्यायालय में आपकी बेदखली की कार्यवाही करूंगा/करूंगी, और आपसे अंतःकालीन लाभ (mesne profits), हर्जाना तथा कार्यवाही का व्यय भी वसूल करूंगा/करूंगी। यह सूचना विधि के अंतर्गत मेरे अन्य अधिकारों एवं उपचारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दी जा रही है। _______________ दिनांक: _______________
किरायेदार बेदखली नोटिस वह लिखित सूचना है जिसमें मकान मालिक किरायेदार से एक तय तिथि तक परिसर खाली करने को कहता है। जहाँ संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 लागू है और करार या स्थानीय क़ानून कुछ और नहीं कहता, वहाँ मासिक किरायेदारी की धारा 106 के अंतर्गत 15 दिन के नोटिस से समाप्त होती है, जो नोटिस मिलने की तिथि से गिने जाते हैं। पर जिन राज्यों में किराया नियंत्रण अधिनियम लागू है, वहाँ बेदखली के आधार और प्रक्रिया वही अधिनियम तय करता है — कोई एक राष्ट्रीय नियम नहीं है।
मुख्य बातें
- नोटिस बेदखली नहीं है। किरायेदार न माने तो कब्जा वापस पाने का रास्ता सक्षम किराया न्यायालय, किराया प्राधिकारी या दीवानी न्यायालय है — प्रारूप भी यही कहता है।
- धारा 106 का 15 दिन का नियम तभी लागू है जब करार, स्थानीय क़ानून या प्रथा कुछ और न कहे। पहले अपना किराया करार और राज्य का किराया क़ानून देखें।
- धारा 106(3) के अनुसार नोटिस केवल इसलिए अमान्य नहीं होता कि उसमें दी गई अवधि कम है, बशर्ते वाद या कार्यवाही उस अवधि के बीतने के बाद दाख़िल हो।
- नोटिस लिखित, हस्ताक्षरित हो और डाक से भेजा जाए या किरायेदार अथवा उसके परिवार के सदस्य को दिया जाए; यह संभव न हो तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाया जाए।
- बिजली-पानी काटकर या ताला बदलकर किरायेदार को निकालना ग़ैरक़ानूनी है; उदाहरण के लिए दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 45 आवश्यक सेवाएँ रोकने पर रोक लगाती है।
यह दस्तावेज़ कब उपयोग करें
- ✓किरायेदारी की अवधि समाप्त हो गई है और आप परिसर वापस चाहते हैं
- ✓किरायेदार ने किराया नहीं दिया या करार की कोई शर्त तोड़ी है, और आप किरायेदारी समाप्त करना चाहते हैं
- ✓आप बेदखली की कार्यवाही से पहले लिखित नोटिस और उसकी सेवा का प्रमाण बनाना चाहते हैं
- ✓मौखिक या मासिक किरायेदारी को धारा 106 के अनुसार नोटिस देकर समाप्त करना है
आवश्यक जानकारी की सूची
दस्तावेज़ बनाने से पहले यह जानकारी तैयार रखें।
पूरा नमूना प्रारूप
बेदखली सूचना
दिनांक: {{notice_date}}
प्रति,
{{tenant_name}}
{{tenant_address}}
विषय: किरायेदारी समाप्ति तथा {{property_address}} पर स्थित परिसर खाली करने की सूचना
महोदय/महोदया,
मैं, {{landlord_name}}, {{property_address}} पर स्थित परिसर का स्वामी एवं मकान मालिक, आपको यह सूचना देता/देती हूं।
आप {{lease_start_date}} से उक्त परिसर में मेरे किरायेदार हैं। इस सूचना का कारण निम्नलिखित है:
{{eviction_reason}}
मैं एतद्द्वारा उक्त परिसर की आपकी किरायेदारी {{vacate_by_date}} से समाप्त करता/करती हूं। आपसे अपेक्षा है कि आप उस तिथि को या उससे पहले परिसर शांतिपूर्वक खाली करके सभी चाबियों सहित उसका खाली कब्जा मुझे सौंप दें।
यदि आप उक्त तिथि तक परिसर खाली नहीं करते, तो मैं सक्षम किराया नियंत्रक, किराया प्राधिकारी, किराया न्यायालय या सिविल न्यायालय में आपकी बेदखली की कार्यवाही करूंगा/करूंगी, और आपसे अंतःकालीन लाभ (mesne profits), हर्जाना तथा कार्यवाही का व्यय भी वसूल करूंगा/करूंगी।
यह सूचना विधि के अंतर्गत मेरे अन्य अधिकारों एवं उपचारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दी जा रही है।
{{landlord_name}}
दिनांक: {{notice_date}}आपका विवरण अपने आप भर जाता है। Word (.docx) या PDF में डाउनलोड करें — निःशुल्क, बिना साइनअप।
GetNyay क्यों चुनें?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किरायेदार को घर खाली करने का नोटिस कितने दिन का होना चाहिए?▼
मकान खाली कराने का नोटिस कैसे भेजें?▼
किरायेदार घर खाली नहीं कर रहा तो क्या करें?▼
क्या 15 दिन से कम का नोटिस अमान्य हो जाता है?▼
किराया नियंत्रण अधिनियम वाले राज्य में बेदखली कैसे होती है?▼
बेदखली नोटिस में कारण क्या लिखें?▼
क्या मकान मालिक किरायेदार की बिजली-पानी काट सकता है?▼
क्या यह नोटिस मैं स्वयं भेज सकता हूँ?▼
इस बेदखली नोटिस प्रारूप में क्या लिखा आता है
यह प्रारूप एक छोटा, सीधा नोटिस बनाता है। शीर्षक "बेदखली सूचना" है, फिर तिथि, और किरायेदार का नाम और पता। विषय-पंक्ति में उस परिसर का पता होता है जिसे खाली कराना है। पहले अनुच्छेद में आप स्वयं को संपत्ति का स्वामी बताते हैं, फिर यह कि किरायेदार किस तिथि से परिसर में रह रहा है।
इसके बाद वह कारण आता है जो आप "बेदखली का कारण" फ़ील्ड में लिखते हैं — प्रारूप इसे आपके शब्दों में ही रखता है। फिर यह कथन कि आप उस तिथि से किरायेदारी समाप्त कर रहे हैं, उस तिथि तक शांतिपूर्वक परिसर खाली करके सभी चाबियों सहित खाली कब्जा सौंपने की अपेक्षा, और यह चेतावनी कि ऐसा न होने पर आप सक्षम किराया नियंत्रक, किराया प्राधिकारी, किराया न्यायालय या दीवानी न्यायालय में बेदखली की कार्यवाही करेंगे और अंतःकालीन लाभ, हर्जाना तथा कार्यवाही का व्यय वसूलेंगे। पूरा नोटिस "मैं" की भाषा में है, क्योंकि उस पर मकान मालिक के रूप में आप स्वयं हस्ताक्षर करते हैं। अंत में आपका नाम और तिथि।
| फ़ील्ड | क्या लिखें | क्यों ज़रूरी है |
|---|---|---|
| सूचना की दिनांक | जिस दिन नोटिस भेजा जा रहा है | नोटिस की अवधि इसी के आसपास से, और धारा 106(2) में प्राप्ति की तिथि से, गिनी जाती है |
| किरायेदार का नाम और पता | करार में लिखा पूरा नाम; पता वही परिसर | ग़लत नाम या पता सेवा (service) पर विवाद खड़ा करता है |
| संपत्ति का पता | मकान/फ़्लैट संख्या, भवन, मोहल्ला, शहर, पिन | किस परिसर की बात है, इसमें कोई संदेह न रहे |
| किरायेदारी शुरू होने की तिथि | करार की तिथि या कब्जा देने की तिथि | किरायेदारी का महीना कब पूरा होता है, यह इसी से दिखता है |
| बेदखली का कारण | तथ्यात्मक कारण — बकाया किराया, अवधि समाप्त, बिना अनुमति शिकमी देना आदि | राज्य किराया क़ानून में आधार सीमित हो सकते हैं; कारण उन्हीं में से होना चाहिए |
| खाली करने की अंतिम तिथि | कम से कम उतने दिन बाद की तिथि जितना नोटिस करार या क़ानून माँगता है | कम अवधि पर कार्यवाही उस अवधि के बाद ही हो सकती है |
किरायेदार को घर खाली करने का नोटिस कितने दिन का होना चाहिए
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 106(1) कहती है कि करार, स्थानीय क़ानून या प्रथा के अभाव में, कृषि या विनिर्माण के प्रयोजन से भिन्न किसी भी प्रयोजन का पट्टा मासिक पट्टा माना जाता है और मकान मालिक या किरायेदार 15 दिन के नोटिस से उसे समाप्त कर सकता है। कृषि या विनिर्माण के प्रयोजन का पट्टा वार्षिक माना जाता है और छह माह के नोटिस से समाप्त होता है।
2002 के संशोधन ने तीन बातें जोड़ीं। धारा 106(2): अवधि नोटिस मिलने की तिथि से शुरू होती है। धारा 106(3): नोटिस केवल इसलिए अमान्य नहीं होगा कि उसमें लिखी अवधि उपधारा (1) की अवधि से कम है, बशर्ते वाद या कार्यवाही उपधारा (1) की अवधि बीतने के बाद दाख़िल हो। धारा 106(4): नोटिस लिखित हो, देने वाले द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित हो, और डाक से भेजा जाए या व्यक्तिगत रूप से या परिवार के सदस्य अथवा नौकर को उसके निवास पर दिया जाए; यह संभव न हो तो संपत्ति के प्रमुख भाग पर चिपकाया जाए।
| स्रोत | क्या देखें |
|---|---|
| राज्य का किराया क़ानून | जहाँ लागू है, वहाँ बेदखली के आधार, नोटिस और मंच वही तय करता है |
| आपका किराया करार | करार में लिखी नोटिस अवधि — जैसे एक या दो माह — धारा 106 के 15 दिन पर प्रभावी होती है |
| धारा 106, संपत्ति अंतरण अधिनियम | करार या स्थानीय क़ानून चुप हो तो: मासिक पट्टे पर 15 दिन, कृषि/विनिर्माण पट्टे पर छह माह |
पंजीकृत डाक कुछ दिन में पहुँचती है, और अवधि उसके मिलने से गिनी जाती है। इसलिए "खाली करने की अंतिम तिथि" भेजने की तिथि से ठीक 15 दिन पर न रखें; डाक का समय जोड़कर तिथि तय करें, और करार में लंबी अवधि हो तो वही लें।
राज्य का किराया नियंत्रण अधिनियम बेदखली को कैसे बदलता है
बेदखली का कोई एक राष्ट्रीय नियम नहीं है। कई राज्यों के किराया नियंत्रण अधिनियम यह तय करते हैं कि किरायेदार को किन आधारों पर ही निकाला जा सकता है — जैसे किराया न देना, बिना अनुमति शिकमी देना, परिसर को क्षति, या मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता — और यह कि मामला किराया नियंत्रक या किराया न्यायालय में जाएगा। ऐसे परिसर पर धारा 106 का नोटिस अकेले पर्याप्त नहीं होता; उस अधिनियम का आधार भी सिद्ध करना होता है।
ये अधिनियम हर परिसर पर लागू भी नहीं होते। उदाहरण के लिए, दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 ₹3,500 मासिक से अधिक किराये वाले परिसरों पर लागू नहीं होता; वहाँ सामान्यतः संपत्ति अंतरण अधिनियम का रास्ता बचता है। जिन राज्यों ने आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के आधार पर क़ानून बनाया है, वहाँ किराया प्राधिकारी और किराया न्यायालय की अपनी व्यवस्था है।
- 1देखें कि आपके राज्य और शहर में कौन-सा किराया क़ानून लागू है, और क्या आपका परिसर उसके दायरे में आता है।
- 2यदि आता है, तो उस अधिनियम के बेदखली के आधार पढ़ें और नोटिस का कारण उन्हीं में से एक पर रखें।
- 3उस अधिनियम में अलग नोटिस या अवधि की माँग हो तो उसका पालन करें — प्रारूप की तिथि उसी के अनुसार रखें।
- 4यदि परिसर उसके दायरे से बाहर है, तो करार और धारा 106 तथा 111 के अनुसार किरायेदारी समाप्त करें।
किरायेदारी किन तरीक़ों से समाप्त होती है — धारा 111
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 पट्टा समाप्त होने के तरीक़े बताती है। बेदखली नोटिस के लिए तीन सबसे प्रासंगिक हैं, और आपका "बेदखली का कारण" बताता है कि आप किस पर निर्भर हैं।
| खंड | कब लागू | नोटिस में क्या लिखें |
|---|---|---|
| 111(a) — अवधि बीतना | करार की तय अवधि समाप्त हो गई और नवीनीकरण नहीं हुआ | करार की तिथि, अवधि और समाप्ति तिथि |
| 111(g) — समपहरण (forfeiture) | किरायेदार ने करार की ऐसी स्पष्ट शर्त तोड़ी जिस पर पुनः प्रवेश का अधिकार लिखा है | शर्त का खंड, उल्लंघन, और पट्टा समाप्त करने का आशय — धारा 111(g) लिखित सूचना माँगती है |
| 111(h) — नोटिस की अवधि बीतना | पट्टा समाप्त करने का नोटिस विधिवत दिया गया और उसकी अवधि बीत गई | यह कि इस नोटिस से किरायेदारी समाप्त की जा रही है, और अंतिम तिथि |
मकान खाली कराने का नोटिस कैसे भेजें और क्या साथ रखें
- 1प्रारूप भरें और कारण तथ्यात्मक लिखें — तिथियाँ, राशि और करार का संबंधित खंड।
- 2बकाया किराया कारण है तो कौन-से महीने और कुल कितनी राशि बाक़ी है, यह कारण में लिखें; चाहें तो बकाये की सूची संलग्न करें।
- 3नोटिस पर हस्ताक्षर करें और उसकी प्रतियाँ रखें।
- 4पंजीकृत डाक (प्राप्ति-स्वीकृति सहित) से भेजें; धारा 106(4) डाक से भेजने की अनुमति देती है, और रसीद तथा ट्रैकिंग सेवा का प्रमाण बनते हैं।
- 5हाथ से दें तो प्रति पर प्राप्ति के हस्ताक्षर और तिथि लें; कोई न मिले तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाकर उसकी फ़ोटो रखें।
- 6करार की प्रति, किराये की रसीदें और पत्राचार एक फ़ाइल में रखें — कार्यवाही होने पर यही आपके साक्ष्य होंगे।
ताला बदलना, सामान बाहर रखना, या बिजली-पानी कटवाना बेदखली का क़ानूनी रास्ता नहीं है और उल्टा आपके विरुद्ध कार्यवाही का कारण बन सकता है। दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 45 जैसे प्रावधान किरायेदार को ऐसी सेवाएँ बहाल कराने के लिए किराया नियंत्रक के पास जाने का अधिकार देते हैं। नोटिस की अवधि बीतने पर किरायेदार न जाए तो सक्षम मंच में कार्यवाही करें।
बेदखली नोटिस की आम ग़लतियाँ
- करार में लिखी नोटिस अवधि से कम समय देना।
- भेजने की तिथि से 15 दिन गिनना, जबकि अवधि नोटिस मिलने से गिनी जाती है।
- ऐसा कारण लिखना जो राज्य के किराया क़ानून में बेदखली का आधार ही नहीं है।
- कारण में भावनात्मक या आरोप वाली भाषा — तथ्य, तिथियाँ और राशि पर्याप्त हैं।
- केवल व्हाट्सऐप पर भेजना और डाक या हस्त-सेवा का कोई प्रमाण न रखना।
- नोटिस की अवधि बीतने से पहले ही कार्यवाही दाख़िल कर देना।
- नोटिस में यह न लिखना कि किरायेदारी किस तिथि से समाप्त की जा रही है — धारा 111(h) के लिए यही कथन निर्णायक है।
सोदाहरण गणना
उदाहरण 1: बिना लिखित करार की मासिक किरायेदारी
- किरायेदारी
- मौखिक, मासिक किराया ₹12,000
- राज्य किराया क़ानून
- परिसर उसके दायरे में नहीं
- नोटिस भेजा
- 1 अक्टूबर 2026, पंजीकृत डाक से
- नोटिस मिला
- 5 अक्टूबर 2026 (ट्रैकिंग के अनुसार)
- 1.करार नहीं है, इसलिए धारा 106(1) लागू: मासिक पट्टा, 15 दिन का नोटिस।
- 2.धारा 106(2): अवधि 5 अक्टूबर से गिनी जाएगी, इसलिए 15 दिन 20 अक्टूबर 2026 को पूरे होते हैं।
- 3.डाक में देरी का जोखिम देखते हुए नोटिस में खाली करने की तिथि 31 अक्टूबर 2026 रखी गई।
- 4.किरायेदार न जाए तो कार्यवाही 20 अक्टूबर के बाद ही दाख़िल हो — यहाँ 31 अक्टूबर के बाद।
1 अक्टूबर को भेजे गए नोटिस में 31 अक्टूबर की तिथि रखने से धारा 106 की 15 दिन की अवधि डाक के समय के बाद भी पूरी रहती है।
उदाहरण 2: 11 माह के करार में दो माह की नोटिस अवधि
- करार
- 11 माह, 1 जनवरी 2026 से
- नोटिस खंड
- दोनों पक्षों के लिए दो माह
- कारण
- करार की अवधि 30 नवंबर 2026 को समाप्त; नवीनीकरण नहीं होगा
- 1.करार में दो माह का नोटिस लिखा है, इसलिए धारा 106 का 15 दिन का नियम पीछे चला जाता है — धारा 106 स्वयं "करार के अभाव में" लागू होती है।
- 2.कारण में लिखें कि करार 1 जनवरी 2026 से 11 माह का था और 30 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है (धारा 111(a))।
- 3.दो माह की अवधि का पालन करने के लिए नोटिस सितंबर के अंत तक भेजें, ताकि किरायेदार को 30 नवंबर से पहले पूरे दो माह मिलें।
- 4.खाली करने की तिथि 30 नवंबर 2026 रखें और सुरक्षा जमा की वापसी का उल्लेख अलग पत्र में करें।
करार की अपनी नोटिस अवधि का पालन करने वाला नोटिस, जिसमें अवधि-समाप्ति का आधार स्पष्ट है।
जाँचे गए आधिकारिक स्रोत
इस पृष्ठ के कथन जिन अधिनियमों, नियमों और नियामक पृष्ठों के विरुद्ध जाँचे गए हैं।
- Fifteen days’ notice for a monthly lease absent contract, local law or usage; the period runs from receipt; a short notice is not invalid if proceedings follow the statutory period; modes of service; and the ways a lease is determined.
- Delhi Rent Control Act, 1958 — Sections 3(c) and 45An example of a State rent law: premises above ₹3,500 monthly rent are outside it, and a landlord may not cut off or withhold essential supplies.
- Model Tenancy Act, 2021A model law binding only in states and union territories that have enacted or adopted it. Deposit capped at two months’ rent for residential premises.
पंजीकृत डाक (प्राप्ति-स्वीकृति सहित) से भेजें, या हाथ से देकर प्राप्ति के हस्ताक्षर लें; दोनों संभव न हों तो परिसर के प्रमुख भाग पर चिपकाएँ (संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 106(4))। जहाँ धारा 106 की 15 दिन की अवधि लागू है, वह नोटिस मिलने की तिथि से गिनी जाती है।
अपना दस्तावेज़ तैयार करें
अपना विवरण भरें और कुछ ही मिनटों में उपयोग योग्य Word या PDF दस्तावेज़ डाउनलोड करें — निःशुल्क, बिना वॉटरमार्क और बिना साइनअप।